PRITHVI 2026: जब करोड़ों वर्षों का पृथ्वी का इतिहास बड़े पर्दे पर हुआ जीवंत

PRITHVI 2026: जब करोड़ों वर्षों का पृथ्वी का इतिहास बड़े पर्दे पर हुआ जीवंत

लखनऊ | 23 जुलाई 2026

क्या करोड़ों वर्ष पुराने जीवाश्म केवल संग्रहालयों की अलमारियों तक सीमित रहने चाहिए? क्या पृथ्वी के विकास, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता की कहानियाँ आम लोगों तक रोचक और प्रभावशाली तरीके से पहुँच सकती हैं? इन सवालों का उत्तर खोजने की दिशा में एक अनूठी पहल है "PRITHVI 2026 – The Palaeoscience Film Festival of India & National Dialogue", जिसकी शुरुआत गुरुवार को लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) में हुई।

तीन दिनों तक चलने वाला यह राष्ट्रीय आयोजन विज्ञान, सिनेमा, मीडिया और जनसंचार का ऐसा संगम है, जहाँ वैज्ञानिक, फिल्मकार, पत्रकार, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी एक मंच पर एकत्र हुए हैं। आयोजन का उद्देश्य पृथ्वी विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक सोच को फिल्मों तथा डिजिटल मीडिया के माध्यम से आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना है।

विज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का नया माध्यम

कार्यक्रम का उद्घाटन बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध तभी सार्थक होते हैं जब वे समाज तक पहुँचें, और फिल्मों से बेहतर माध्यम शायद ही कोई दूसरा हो। उन्होंने युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा शोध एवं नवाचार को लोकप्रिय बनाने में ऐसे आयोजनों की महत्त्वपूर्ण भूमिका बताई।

BSIP के निदेशक एवं फेस्टिवल डायरेक्टर प्रो. महेश जी. ठक्कर ने कहा कि विज्ञान और समाज के बीच संवाद स्थापित करने में सिनेमा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर आम नागरिकों तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है।


एक मंच पर विज्ञान, मीडिया और सिनेमा की दिग्गज हस्तियाँ

उद्घाटन समारोह में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा, पूर्व महानिदेशक (Films Division) एवं पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक (प्रसार भारती) डॉ. मुकेश शर्मा, DW Hindi के प्रमुख महेश झा, वरिष्ठ अभिनेत्री एवं रंगकर्मी सुजाता मेहता सहित अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, मीडिया विशेषज्ञ और फिल्मकार उपस्थित रहे।

डॉ. शिव कुमार शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए विज्ञान आधारित फिल्मों को समय की आवश्यकता बताया। वहीं डॉ. मुकेश शर्मा ने कहा कि विज्ञान संचार को प्रभावी बनाने में फिल्म महोत्सव समाज में वैज्ञानिक चेतना विकसित करने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। महेश झा ने युवाओं को विज्ञान पत्रकारिता और विज्ञान संचार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।


'Fossil Memoirs' से हुआ फिल्म महोत्सव का शुभारंभ

उद्घाटन सत्र में Festival Book तथा "Palaeoscience Today" लोकप्रिय विज्ञान पत्रिका का विमोचन किया गया। इसके बाद वरिष्ठ विज्ञान फिल्मकार नंदन कुद्याड़ी की चर्चित डॉक्यूमेंट्री Fossil Memoirs – Episode 1 के प्रदर्शन के साथ फिल्म महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

अगले तीन दिनों में पृथ्वी विज्ञान, जीवाश्म, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, भू-विरासत, महासागर, हिमालय, आर्कटिक और जैव विविधता जैसे विषयों पर भारत और विदेशों की 50 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।


आठ राष्ट्रीय मास्टरक्लास होंगे आकर्षण का केंद्र

PRITHVI 2026 केवल फिल्म प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। आयोजन में देश के वरिष्ठ विज्ञान फिल्मकारों, मीडिया विशेषज्ञों और पर्यावरण पत्रकारों द्वारा आठ विशेष मास्टरक्लास आयोजित की जा रही हैं। इनमें प्रमुख विषय हैं—

  • डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण
  • पर्यावरण पत्रकारिता
  • Artificial Intelligence (AI) आधारित फिल्म निर्माण
  • Visual Storytelling
  • Geotourism Filmmaking
  • Science Communication
  • Research Paper से Documentary Script तैयार करना
  • Extreme Environment Filmmaking

इन सत्रों का उद्देश्य युवा फिल्मकारों, पत्रकारों और छात्रों को विज्ञान संचार की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है, ताकि वे जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल, रोचक और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत कर सकें।


मीडिया, विज्ञान और समाज के बीच संवाद

महोत्सव के दौरान विज्ञान संचार, मीडिया और सिनेमा की भूमिका पर दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पैनल चर्चा भी आयोजित की जाएँगी। इनमें देश के प्रमुख समाचार पत्रों के संपादक, आकाशवाणी, विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद, विज्ञान संस्थानों के वैज्ञानिक और फिल्मकार भाग लेंगे। चर्चा का मुख्य विषय होगा कि विज्ञान को आम जनता तक प्रभावी ढंग से कैसे पहुँचाया जाए और मीडिया इसमें क्या भूमिका निभा सकता है।




प्रतियोगिताएँ और पुरस्कार भी होंगे

महोत्सव में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, जियो-हेरिटेज, जियो-टूरिज्म, एनीमेशन, छात्र फिल्म तथा डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं। अंतिम दिन चयनित फिल्मों को PRITHVI 2026 Awards से सम्मानित किया जाएगा।


क्यों महत्वपूर्ण है PRITHVI 2026?

डिजिटल युग में जहाँ सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं, वहीं वैज्ञानिक तथ्यों के बारे में भ्रम और गलत जानकारी भी उतनी ही तेजी से लोगों तक पहुँचती है। ऐसे समय में विज्ञान आधारित फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि वैज्ञानिक सोच विकसित करने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज को तथ्यपरक जानकारी देने का प्रभावी साधन बन सकती हैं।

PRITHVI 2026 इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए विज्ञान, मीडिया और सिनेमा के बीच एक ऐसा राष्ट्रीय मंच तैयार कर रहा है जहाँ शोध, रचनात्मकता और जनसंचार एक-दूसरे के पूरक बनते दिखाई देते हैं।


निष्कर्ष

धरती का इतिहास करोड़ों वर्षों पुराना है, लेकिन उसकी कहानी आज भी लगातार लिखी जा रही है। यदि यह कहानी केवल वैज्ञानिक शोधपत्रों और संग्रहालयों तक सीमित रहेगी, तो समाज उससे पूरी तरह जुड़ नहीं पाएगा। लेकिन जब यही इतिहास कैमरे की आँख से गुजरकर बड़े पर्दे पर जीवंत होता है, तब विज्ञान केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि महसूस भी किया जाता है।

PRITHVI 2026 इसी विचार का सशक्त उदाहरण है। यह महोत्सव केवल फिल्मों का उत्सव नहीं, बल्कि विज्ञान, पर्यावरण और समाज के बीच संवाद स्थापित करने का एक राष्ट्रीय अभियान है, जो आने वाली पीढ़ियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पृथ्वी के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।